Shree Hari Satsang Samiti

एकल सुर एकल ताल

एकल सुर एकल ताल

वनवासी रक्षा परिवार फाउण्डेशन (श्रीहरि सत्संग समिति इन्द्रप्रस्थ) दिल्ली में प्रशिक्षण ले रही एकल कलाकारों की टोली ने वर्ष 2017 में एकल विद्यालय फाउण्डेशन अमेरिका में होने वाले कार्यक्रम के दूसरे प्रशिक्षण भाग की प्रस्तुति एकल सुर एकल ताल के नाम से सोमवार 30 मई 2016 को रोहिणी सेक्टर 22 स्थित महाराजा अग्रसेन इन्स्टिट्यूट आफ टेक्नालाजी में प्रस्तुत की। एकल अभियान के प्रणेता एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रभारी मा. श्याम जी गुप्त की गरिमामयी उपस्थिति और एकल ग्लोबल के केन्द्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष मा. बजरंगलाल बागड़ा जी तथा एकल विद्यालय फाउण्डेशन अमेरिका की वरिष्ठ कार्यकर्ता श्रीमती रेणु गुप्ता के सानिध्य में कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।

वनवासी कलाकारों द्वारा राष्ट्रीय एकता व समरसता को समर्पित गीत ‘‘मिले सुर मेरा तुम्हारा‘‘ के साथ एकल गीत ‘‘हमको तो रहना है एक दूजे के साथ‘‘ से कार्यक्रम प्रारम्भ किया। उससे पहले एकल परिवार के सभी संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया और मंगलाचरण किया गया।

एकल सुर एकल ताल को सम्पूर्ण देश के फैले एकल विद्यालयों और देश के विभिन्न प्रान्तों से आये एकल कलाकारों के दृष्टिगत व्यापक राष्ट्रीयता और भारतवर्ष की विविधता को संगीतमय स्वरूप में प्रस्तुत करने के लिये अलग.अलग निम्नवत भागों में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में भारतीय भक्ति संगीत एवं नृत्य जिसमें मीराबाई के भजनों की श्रंृखला नृत्य अभिनय के साथ प्रस्तुत की गई। सुरीले भजनों और वाद्ययंत्रों की सुमधुर धुनों पर एकल कलाकारों के सामूहिक नृत्य ने न केवल उपस्थित श्रोताओं और दर्शकों को प्रभावित किया अपितु उपस्थित दर्शकों को नृत्य एवं भक्ति के साथ भाग लेने पर मजबूर कर दिया। बड़ी संख्या में महिला पुरूष संगीत पर झूमते एवं नृत्य करते रहे।

अगले भाग में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित सजीव प्रस्तुति दी गई। बहुत सुन्दर परिधानों में एकल कलाकारों ने श्रीकृष्ण जन्म से लेकर पूतना वध और बालसखाओं के साथ खेल.खेल में कालिया नागमर्दन की मनोहारी प्रस्तुति देकर श्रोताओं का मन मोह लिया। तत्पश्चात धर्मरक्षा के लिये कंसवध और महात्मा विदुर के साथ श्रीकृष्ण के प्रसंग में भक्ति की प्रतिष्ठापना की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। साथ ही श्रीकृष्ण सुदामा के मार्मिक प्रसंग से दोस्ती-मैत्री, करूणा, सहयोग की अति मनोहारी प्रस्तुति दी गई। वनवासी कलाकारों की यह रंगारंग प्रस्तुति लाइट-साउण्ड शो के साथ पहली बार दी गई थी। उपस्थित सभी पदाधिकारियों और दर्शकों ने वनवासी कलाकार टोली के परिश्रम की सराहना की।

अपने स्वागत भाषण में वनवासी रक्षा परिवार फाउण्डेशन (श्रीहरि सत्संग समिति) के कार्याध्यक्ष मा. मुरारी लाल अग्रवाला ने उपस्थित एकल परिवार का स्वागत किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य की जानकारी दी।
मा. बजरंगलाल जी बागड़ा ने अमेरिका विस्तार के लिये एकल कलाकारों की भूमिका, उनका महत्व और एकल अभियान में इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि यह कार्यक्रम अभी केवल एकल परिवार के सीमित लोगों के लिये प्रस्तुत किया जा रहा है। कार्यक्रम के पश्चात इसकी समीक्षा होगी और सुझावों को देखते हुये कार्यक्रम को और परिष्कृत किया जायेगा। उपस्थित सभी से सुझाव देने की अपील करते हुये श्री बागड़ाजी ने बताया कि यह टोली अमेरिका जाने से पहले देशभर में कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपने प्रदर्शन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लायेगी जिससे अभियान को मिलने वाले सहयोग कार्यक्रम को बल मिल सके।
कार्यक्रम के अगले भाग में हिमाचल, असम, सिक्किम, झारखण्ड, राजस्थान, गुजरात के लोकगीतों की सामान्य अभिनय नृत्य के साथ प्रस्तुति हुई। स्थानीय बोली, लोकधुन व संगीत पर आधारित स्थानीय वेशभूषा में पारम्परिक गीत एवं नृत्य की लड़ीवार प्रस्तुति को बहुत सराहा गया।

कार्यक्रम में वनवासी रक्षा परिवार फाउण्डेशन (श्रीहरि सत्संग समिति) के केन्द्रीय अध्यक्ष मा. मनोज अरोड़ा ने अभियान के सभी प्रकल्पों द्वारा वनबन्धुओं के कल्याण के लिये किये जा रहे कार्यक्रमों की सराहना करते हुये, एकल कलाकारों की टोली को प्रशिक्षण के साथ साथ हर प्रकार के सहयोग का आश्वासन देते हुये अपील की कि सब संगठनों को एकजुट होकर एकल अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये समर्पित कार्य करना होगा। वनबन्धु और नगरीय समाज के बीच आवश्यक सम्पर्क, सहयोग, सहभागिता के माध्यम से समरस, सशक्त, स्वावलम्बी, शिक्षित एवं संस्कारित भारत की कल्पना को साकार करके भारत को विश्वगुरू के पद पर प्रतिष्ठापित करने के इस राष्ट्रीय यज्ञ में सबका सहयोग आवश्यक है।
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में सम्पूर्ण रामायण की संगीत-नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। श्रीराम जन्म, सीता स्वयम्बर से लेकर वनवास गमन, भगवान श्रीराम एवं केवट प्रसंग तथा माता शबरी के जूठे बेर खाने के प्रसंग को बहुत मार्मिक भाव से प्रस्तुत किया गया। सीताहरण, हनुमान मिलन, सेतुबंधन और रावणवध के बाद राज्याभिषेक की संगीत एवं नृत्यमयी प्रस्तुति सभी को अति प्रभावित लगी। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रभक्ति को समर्पित सामूहिक गीत ‘‘जय हो‘‘ की अत्यंत सुन्दर, उत्साहवर्धक प्रस्तुति हुई जिसमें श्रोताओं ने मंच पर और मंच के आगे पूरे जोश के साथ भाग लिया, नृत्य किया और भारत माता की जय, वन्दे मातरम के उद्घोष किये।

मा. श्यामजी गुप्त ने अपने उद्बोधन में श्रीहरि कथा के कथाकारों के द्वारा एकल कलाकारों की भूमिका में नृत्य-संगीत-अभिनय के लिये सभी कलाकारों की प्रशंसा की और बताया कि अभियान के बृहद् उद्देश्यों और विस्तार के लिये कथाकारों को कलाकारों की भूमिका में लाना पड़ा लेकिन कथाकारों की मेहनत, त्याग और परिश्रम अभियान को सुदृढ़ करने, विस्तार देने, एकल कलाकारों की पहचान स्थापित करने तथा रंगमंचीय प्रस्तुति के माध्यम से प्रवासी भारतीयों के साथ साथ विदेशों में अपने संस्कार, मूल्य, परम्पराओं और भारतीय संगीत को प्रतिस्थापित करने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करेंगे। मा. श्यामजी गुप्त ने सभी प्रशिक्षकों, व्यवस्थापकों, सहयोगियों और वनवासी रक्षा परिवार फाउण्डेशन के पदाधिकारियों का अभिनन्दन किया और शुभकामनायें दीं।

एकल विद्यालय फाउण्डेशन अमेरिका र्से आइं श्रीमती रेणु गुप्ता ने कहा कि एकल कलाकारों की यह प्रस्तुति अद्भुत है, सराहनीय है और निश्चित तौर पर अमेरिका वासियों को अच्छी लगेगी। कार्यक्रम को और सुन्दर बनाने के लिये सुझाव दिये जायेंगे, अभ्यास से प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया जायेगा और एकल के इस नये अध्याय से अभियान प्रगति की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम में एकल अभियान के सभी संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने भाग लिया। जिनमें एकल विद्यालय फाउण्डेशन आॅफ इण्डिया के सर्वश्री मधुसुमन धीर, राजेश गोयल, रविदेव गुप्ता, एकल संस्थान से प्रो. मंजुश्रीवास्तव, एकल ग्रामोत्थान के श्री इंद्रमोहन अग्रवाल, भारत लोक शिक्षा परिषद के श्री अश्वनी अग्रवाल, श्रीहरि सत्संग समिति आगरा के महामंत्री श्री संजय गोयल के साथ श्रीहरि सत्संग समिति की केन्द्रीय कार्यकारिणी और विभाग से सभी पदाधिकारी एवं सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित थे।

अंत में मा. श्यामजी गुप्त ने एकल सुर एकल ताल के प्रशिक्षक-निर्देशक श्री हरिवंश पण्डित के साथ.साथ कोरियोग्राफर श्री खेमजी, निशाजी, कुलदीपजी, रुचिजी, संगीतज्ञ श्री हिमांशु पाण्डे एवं अन्य उपस्थित सहयोगियों को सम्मानित किया। वनवासी रक्षा परिवार फाउण्डेशन के केन्द्रीय महामंत्री श्री दिग्विजय गुप्ता जी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के पश्चात प्रीतिभोज के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।