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उदयपुर, राजस्थान वनयात्रा उत्तरी विभाग, दिल्ली

उदयपुर, राजस्थान वनयात्रा उत्तरी विभाग, दिल्ली

केन्द्रीय कार्याध्यक्ष माननीय श्री मुरारी लाल अग्रवाला जी के नेतृत्व में 19 पुरूष और 14 महिलायें कुल 33 वनयात्रियों का एक दल दिल्ली से शुक्रवार सांय 7.00 बजे रवाना हुआ। उदयपुर रेलवे स्टेशन पर उदयपुर संभाग समिति के अध्यक्ष श्रीमान रामजस मुधराजी, अभियान प्रभारी श्री निर्मल जी, भाग सचिव श्री राजकुमार जैन, संस्कार शिक्षा प्रमुख श्री चन्द्रशेखर जी, भाग अभियान प्रमुख श्री प्रताप सिंहजी, प्राथमिक शिक्षा प्रमुख श्री अमृतलाल जी और वरिष्ठ संघकार्यकर्ता एवं समिति सदस्य श्री विश्वबन्धुजी ने प्रत्येक वनयात्री का फूलमाला पहना कर स्वागत किया।

उदयपुर शहर से बाहर एक सुन्दर रिजाॅर्ट देवी पैलेस में वनयात्रियों ने थोड़ी देर विश्राम किया और जलपान के बाद दो बसों में सवार होकर झाड़ोल संच स्थित आमोड़ गाँव के लिये प्रस्थान किया। तीन घण्टों की पहाड़ों की बस यात्रा के बाद 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा जो खेतों के बीच से थी, यात्री प्रियंजली शाह, अमेरिका द्वारा पोषित चैराफड़ा स्थित एकल विद्यालय संख्या यूएस22185 पहुंचे। स्थानीय समिति अध्यक्ष माननीय बाबूलाल पुरबिया और पूर्णकालीन कार्यकर्ता दल के साथ थे। एकल विद्यालय चैरा फड़ा गांव के श्री गणपत सिंह जी के घर पर 2008 से चल रहा है। विद्यालय में 29 छात्र, जिनमें 15 बालिकायें थी, अपने आचार्य श्री चरणसिंह जी के साथ उपस्थित थे। छात्रों ने बहुत ऊँचे स्वर में ओंकार ध्वनि के साथ सरस्वती वंदना की, देशभक्ति के गीत गाये और वनयात्रियों के प्रश्नों के उत्तर दिये। वनयात्रियों द्वारा छात्रों के लिये कुछ कापी-पेंसिल इत्यादि वितरित किये गये। बच्चों का उत्साह देखकर वनयात्री बहुत प्रसन्न हुये। यात्रियों ने देखा कि जहां गाँव के घर पारम्परिक सामग्री जैसे मिट्टी, खपरैल और कच्चे फर्श से बने थे वहीं घर के अंदर बिजली, टेलीविजन और घर के ऊपर डिश लगी हुई थी। आधुनिकता और प्राचीनता का यह सुन्दर मिश्रण मनोहारी था।

थोड़ी ही दूरी पर गांव में श्रीमान नन्दूसिंह जी के घर पर गांव का सत्संग केन्द्र चलता है। सत्संग केन्द्र का घर तुलनात्मक तौर पर बड़ा था, पक्का था और सुसज्जित था। सत्संग केन्द्र पर केन्द्रीय कार्याध्यक्ष मुरारी जी ने दीपप्रज्वलन किया। सत्संग टोली में केन्द्रीय व्यास प्रशिक्षण प्रमुख श्री शिवनाथ जी, भागव्यास उदयपुर श्री महेश्वर दासजी, कथाकार टोली सदस्य श्री रंजीत कुमार, श्री धर्म सिंह, श्री कन्हैया लाल, श्री अर्जुन सिंह और श्री अशोक कुमार उपस्थित थे।

वनयात्रियों ने बैठकर सत्संग और भजन के आनन्द लिया। यह जान कर बहुत हर्ष हुआ कि इस सत्संग केन्द्र के क्षेत्र में मदिरापान बिलकुल बन्द हो गया है जिसका श्रेय एकल श्रीहरि सत्संग समिति कथाकारों को दिया जाता है।

अगले वनयात्रियों के लिये ऐतिहासिक स्थान हल्दीघाटी दर्शन की व्यवस्था की गई थी। मार्ग में वनयात्रियों ने श्रीनाथ जी के भव्य दर्शन किये और आशीर्वाद लिया। हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप म्यूजियम में रखी ऐतिहासिक, रोमांचकारी और आॅडियो-वीडियों प्रस्तुति ने वनयात्रियों को तत्कालीन परिस्थितियों का परिचय करवाया और महाराणा प्रताप के जीवन प्रसंगों को जीवन्त दिखाने के साथ साथ हल्दीघाटी युद्ध को मानचित्र के साथ प्रस्तुति किया। अधिकतर वनयात्रियों के लिये यह पहला अवसर था जब इतिहास के पन्नों और टेलीविजन के सीरियल महाराणा प्रताप की कर्मस्थली का साक्षात दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ। तीसरे दिन वनयात्रियों ने चित्तौड़गढ़ की यात्रा की। मार्ग में विश्वप्रसिद्ध सांवरिया सेठ मन्दिर के दर्शन किये। सांय चित्तौड़गढ़ के इतिहास से परिचित होकर और विशाल किले के अंदर मीराबाई मंदिर, विजयस्तम्भ, जैन मंदिर और पानी की बौड़ी तथा महारानी पद्मिनी के जौहर स्थल को प्रणाम करके रात्रि टेªन से चलकर 29 मार्च 2016 प्रातः 7 बजे वापस दिल्ली पहुंचे। सभी वनयात्रियों ने यात्रा की व्यवस्था, स्थानीय समिति पदाधिकारियों और एकल विद्यालय और श्रीहरि सत्संग केन्द्र कथाकारों की भूरि-भूरि प्रसंसा की और श्रीहरि सत्संग समिति के कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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